क्रिस्टी कोवेंट्री को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) का नया अध्यक्ष चुना गया है. वह इस प्रतिष्ठित पद तक पहुंचने वाली पहली महिला और पहली अफ्रीकी बन गई हैं. वर्तमान में जिम्बाब्वे की खेल मंत्री के रूप में कार्यरत कोवेंट्री ने अपने करियर में दो बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता है. उन्होंने 2004 के एथेंस ओलंपिक और 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 200 मीटर बैकस्ट्रोक में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था.
आईओसी चुनाव में कोवेंट्री को 97 सदस्यों का समर्थन मिला, जिससे वह सात उम्मीदवारों की रेस में विजयी रहीं. उन्हें 2033 तक के लिए आठ साल का कार्यकाल मिला है. यह चुनाव काफी प्रतिस्पर्धात्मक और अनिश्चित था, क्योंकि मतदान से पहले किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट बढ़त नहीं मिली थी.
थॉमस बाक का समर्थन
एक्सपर्ट्स ने अंदाजा लगाया था कि किसी को पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए कई दौर के मतदान की जरूरत पड़ेगी. कोवेंट्री की इस जीत को निवर्तमान अध्यक्ष थॉमस बाक की भी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने लंबे समय से कोवेंट्री को अपने उत्तराधिकारी के रूप में समर्थन दिया था. हालांकि, मतदान के दौरान बाक ने अपना वोट नहीं डाला.
अध्यक्ष चुने जाने के बाद कोवेंट्री ने क्या कहा?
अध्यक्ष चुने जाने के बाद कोवेंट्री ने कहा, ‘मैं इस सम्मान के लिए आभारी हूं और सभी को गर्व महसूस कराऊंगी. अब हमें मिलकर ओलंपिक आंदोलन को आगे बढ़ाना होगा.’ उन्हें पोडियम पर बधाई देने के लिए जुआन एंटोनियो समारांच आए, जो उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी थे और 28 वोट हासिल कर सके थे.
इस चुनाव में अन्य दावेदारों में ट्रैक और फील्ड के सेबेस्टियन को (8 वोट), स्कीइंग के जोहान एलियाश, साइक्लिंग के डेविड लैपर्टिएंट और जिमनास्टिक के मोरिनारी वतनबे शामिल थे. साथ ही, जॉर्डन के राजकुमार फैसल अल हुसैन भी इस दौड़ में थे.
23 जून को संभालेगी कमान
कोवेंट्री 23 जून को आधिकारिक रूप से ओलंपिक दिवस पर आईओसी की कमान संभालेंगी. वह आईओसी के 131 साल के इतिहास में 10वीं अध्यक्ष बनेंगी. पूर्व अध्यक्ष थॉमस बाक इस पद पर अधिकतम 12 वर्षों तक रहे.
सामने होंगी कई चुनौतियां
नई भूमिका में कोवेंट्री के सामने कई अहम चुनौतियां होंगी. उन्हें 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए राजनीतिक और खेल जगत की जटिलताओं के बीच संतुलन बनाना होगा, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कूटनीतिक संबंध भी शामिल हैं. इसके अलावा, 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए सही स्थान का चयन भी उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा, जिसमें भारत और खाड़ी देशों को संभावित दावेदार माना जा रहा है.
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