भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) के महासचिव हेमंत कलिता को मंगलवार (18 मार्च) को वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में निलंबित कर दिया गया. यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस सुधीर कुमार जैन द्वारा की गई जांच के बाद की गई, जिसमें कलिता और बीएफआई के कोषाध्यक्ष दिग्विजय सिंह को दोषी पाया गया. जांच में दोनों पर अनधिकृत धन निकासी, फर्जी बिलिंग और शक्ति का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे.
बीएफआई के अध्यक्ष ने क्या कहा?
बीएफआई के अध्यक्ष अजय सिंह ने इस मामले पर आधिकारिक बयान में कहा, ‘जस्टिस जैन की रिपोर्ट में दोनों को वित्तीय अनियमितताओं और धन के गलत प्रबंधन का दोषी पाया गया है. यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों ने अपनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन किया है.’ उन्होंने आगे बताया कि रिपोर्ट के निष्कर्षों की गंभीरता को देखते हुए और महासंघ के संचालन की पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने के लिए कलिता और सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है.
खारिज हुआ नामांकन
इसके अलावा, कलिता का आगामी अध्यक्ष चुनाव के लिए नामांकन भी खारिज कर दिया गया. दरअसल, कलिता के दो लगातार कार्यकाल के बाद कूलिंग-ऑफ पीरियड के कारण वह चुनाव में भाग लेने के योग्य नहीं थे. कलिता ने 2021 से 2025 तक महासचिव के रूप में कार्य करने से पहले बीएफआई के कोषाध्यक्ष के रूप में भी काम किया था.
कूलिंग-ऑफ पीरियड अनिवार्य
नामांकन की जांच के बाद रिटर्निंग ऑफिसर आर.के. गौबा ने कलिता को चुनाव में ‘अयोग्य’ घोषित कर दिया, क्योंकि राष्ट्रीय खेल संहिता के अनुसार, एक अधिकारी को लगातार दो कार्यकाल पूरा करने के बाद चार साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड अनिवार्य होता है.
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